सदन और कोन्ता मुण्डा – तमाड़ क्षेत्र का विद्रोह (1819–1821)


पृष्ठभूमि: ईस्ट इंडिया कम्पनी का प्रभाव

  • सन 1800 तक ईस्ट इंडिया कम्पनी ने राजा-रजवाड़ों पर शिकंजा कस दिया था।
  • छोटानागपुर क्षेत्र में राजस्व वसूली को लेकर कम्पनी ने लगातार नीति बदली
  • 1817 का वर्ष अहम था, क्योंकि इसी साल कम्पनी ने सामंती सत्ता छीन ली
  • इसी के साथ छोटानागपुर खास में समाड़ विद्रोह के बीज फूटे।

तमाड़ विद्रोह की शुरुआत (1819)

  • प्रमुख विद्रोही नेता:
    • दौलत राय मुण्डा (इटकी)
    • शंकर मानकी (कासु जंगा)
    • रूदन मुण्डाशिवनाथ मुण्डा (सिंदरी)
    • चंदन सिंह, घुसा सरदार (बगही)
    • भद्रा मुण्डा, टेपा मानकी (बाध बनिया)

विद्रोह की घटनाएँ

  • 21 अगस्त 1819: विद्रोहियों ने पुराना नगर पर हमला किया।
    • कुछ लोग मारे गए, 20 लोग घायल हुए।
    • सम्पत्ति और मवेशी लूट लिए गए
  • 24 अगस्त 1819: विद्रोहियों ने फिर हमला किया
  • 31 अगस्त 1819: पिटुचाड़ा में हमला किया गया।
  • विद्रोही तमाड़ खास और नवाडीह में भी हमला करना चाहते थे।

तमाड़ के राजा की प्रतिक्रिया

  • तमाड़ के राजा गोविन्द शाही ने ईस्ट इंडिया कम्पनी के अधिकारी रफसेज से सहायता की मांग की
  • तमाड़ की दुर्गम भौगोलिक स्थिति विद्रोहियों के पक्ष में थी।

इतिहास में उल्लेख

  • इस विद्रोह का विस्तृत वर्णन इतिहासकार डा० वी. वीरोत्तम ने अपनी पुस्तक “झारखण्ड: इतिहास एवं संस्कृति” में किया है।

विद्रोह का विस्तार और सरकारी प्रतिक्रिया

  • सितम्बर 1819 तक विद्रोह गंभीर रूप ले चुका था।
  • 20 नवम्बर 1819: रफसेज ने शेख इनायतुल्ला खाँ के नेतृत्व में 40 बंदूकधारियों को तमाड़ भेजा
  • दिसम्बर 1819: विद्रोह का विस्तार हुआ, मजिस्ट्रेट ए जे कोलविन पहले से मौजूद था।
  • कम्पनी ने दमन चक्र चलाया:
    • जनवरी से मार्च 1820 तक कई विद्रोही नेता गिरफ्तार किए गए
    • रूदन मुण्डा और कान्ता मुण्डा पकड़ में नहीं आए
    • रूदन मुण्डा की गिरफ्तारी पर इनाम घोषित किया गया।

रूदन मुण्डा की गिरफ्तारी और मृत्यु

  • जुलाई 1820: सरायकेला के कुंवर विक्रम की सहायता से रूदन मुण्डा पकड़ा गया
  • वह बन्दी अवस्था में ही मर गया

प्रशासनिक पुनर्गठन

  • इनायतुल्ला खाँ को मुख्यालय लौटने के लिए कहा गया।
  • कोलविन ने रफसेज को संबलपुर भेजने की सलाह दी।

विद्रोह की पुनरावृत्ति (1821)

  • 1821 में विद्रोह फिर भड़का
  • रामगढ़ के दंडाधिकारी एन स्मिथ को सूचना मिली कि कोन्ता मुण्डा ने सिंहभूम के लड़ाकों को संगठित कर लिया है।
  • कोन्ता मुण्डा तमाड़ पर हमला नहीं कर पाया, लेकिन राजा गोविन्द शाही के लिए आफत बना रहा।

कोन्ता मुण्डा पर इनाम और गिरफ्तारी

  • गोविन्द शाही ने कोन्ता मुण्डा पर 200 रुपये का इनाम घोषित किया।
  • तत्कालीन ढालभूम के राजा को परवाना और मिदनापुर के दंडाधिकारी को पत्र भेजा गया।
  • कोन्ता मुण्डा पर मुकदमा चला और उसकी मृत्यु जेल में हो गई

विद्रोह का अंत

  • कोन्ता मुण्डा की मृत्यु के बाद विद्रोह का अंत हो गया

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